भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अगस्त 2025 में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ देखी गई हैं, जो देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी छलांगें
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भविष्य के लिए अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है, जिसका पहला चरण 2027 में शुरू होगा। इसके साथ ही, भारत 2040 तक पूरी तरह से स्वदेशी मिशन के माध्यम से चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री उतारने की योजना बना रहा है। ये घोषणाएँ भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण में आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षा को रेखांकित करती हैं।
हाल ही में, नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) उपग्रह ने 15 अगस्त, 2025 को अपनी 12 मीटर की विशाल रडार एंटेना को सफलतापूर्वक तैनात किया। 30 जुलाई, 2025 को लॉन्च किया गया यह $1.3 बिलियन का उपग्रह, पृथ्वी की सतह में होने वाले परिवर्तनों को ट्रैक करके आपदा और जलवायु निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके वैज्ञानिक संचालन अक्टूबर 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभ्रांशु शुक्ला नासा के एक्सिओम-4 मिशन के बाद भारत लौट आए हैं। उनका आगमन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। ISRO अगले कुछ महीनों में एक अमेरिकी निर्मित 6,500 किलोग्राम के संचार उपग्रह को भारतीय लॉन्चर का उपयोग करके लॉन्च करने की भी तैयारी कर रहा है।
विनिर्माण और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विस्तार
भारत विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। दक्षिण कोरियाई दिग्गज सैमसंग भारत में लैपटॉप सहित अपने उन्नत प्रौद्योगिकी उपकरणों के उत्पादन का विस्तार करना जारी रखे हुए है। इसी तरह, ताइवानी इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख फॉक्सकॉन ने बेंगलुरु में अपनी नई फैक्ट्री में आईफोन 17 का उत्पादन शुरू कर दिया है। ये कदम भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास को दर्शाते हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में, भारत परिपक्व-नोड चिप विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, और इस वर्ष (2025) में पहले स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप के उत्पादन की उम्मीद है। भारतआई मिशन के तहत जीपीयू कंप्यूट क्षमता के विस्तार सहित सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और डिजाइन सुविधाओं में महत्वपूर्ण निवेश किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी में नवाचार
भारत अपनी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को उन्नत करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहा है। देश अपनी पहली डिजिटल हेल्थ एक्सपो की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है, जिसका उद्देश्य आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी में अपनी बढ़ती ताकत का प्रदर्शन करना है। 12 अगस्त, 2025 तक 800 मिलियन से अधिक ABHA (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) आईडी बनाई जा चुकी हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने प्रेसिजन और पर्सनलाइज्ड हेल्थकेयर में एक नया उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन किया है। यह केंद्र एआई-संचालित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी सफलताओं में तेजी लाने पर केंद्रित होगा। इसी तरह, आईआईटी खड़गपुर ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी युवाओं को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में रोजगार के लिए प्रशिक्षित करने के लिए 'स्कूल फॉर स्किल्स: हेल्थकेयर एंड टेक्नोलॉजी' लॉन्च किया है।
इसके अलावा, भारत ने अपना पहला एनिमल स्टेम सेल बायोबैंक खोला है, जिसका मुख्य ध्यान कल्टिवेटेड मीट पर है, जो जैव प्रौद्योगिकी में देश की प्रगति को दर्शाता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में प्रगति
कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी एजेंडे का एक प्रमुख चालक बनी हुई है। भारत पहली बार ग्लोबल एआई इंडेक्स के शीर्ष 10 में शामिल हो गया है। भारत की राष्ट्रपति ने 2047 तक भारत को वैश्विक एआई हब बनाने के प्रति आशावाद व्यक्त किया है।
सरकार की भारतआई मिशन पहल के तहत, जीपीयू कंप्यूट क्षमता का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें 34,000 जीपीयू तक पहुंच शामिल है, और कैंसर देखभाल में एआई के अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए कैंसर एआई और प्रौद्योगिकी चुनौती (CATCH) जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। भारत का ध्यान आवाज-आधारित एआई और भारतीय भाषाओं के लिए बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) विकसित करने पर है, जिसमें ओपन-सोर्स दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
सरकारी पहल और अनुसंधान को बढ़ावा
वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 'विज्ञान धारा' योजना के लिए बजटीय आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह योजना संस्थागत क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं विकास और नवाचार तथा प्रौद्योगिकी परिनियोजन पर केंद्रित है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।