भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार प्रगति करते हुए पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर स्थापित किए हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-3 प्रोपल्शन मॉड्यूल ने नवंबर 2025 में चंद्रमा के पास दो सफल फ्लाईबाई (6 और 11 नवंबर को) पूरी की हैं, जो इसके मूल मिशन के दो साल बाद हुई हैं। इस गतिविधि ने वैज्ञानिकों को नेविगेशन और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। यह दर्शाता है कि ISRO लैंडिंग के बाद भी अंतरिक्ष यान को सुरक्षित रूप से संचालित करने की उन्नत क्षमता रखता है।
इसी क्रम में, गोदरेज एयरोस्पेस ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन, गगनयान के लिए LVM-3 रॉकेट के L110 चरण को शक्ति प्रदान करने हेतु मानव-रेटेड विकास इंजन का पहला सेट ISRO को वितरित किया है। यह उपलब्धि भारत की अंतरिक्ष आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और ISRO 17 नवंबर को बेंगलुरु में "स्पेस मीट 2025" का आयोजन कर रहे हैं। इस बैठक का उद्देश्य मानव अंतरिक्ष उड़ान अनुसंधान, माइक्रोग्रैविटी अध्ययन और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नवाचार में सहयोग को मजबूत करना है, जिसमें भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा (सेवानिवृत्त) भी शामिल होंगे।
रक्षा और नवाचार में आत्मनिर्भरता
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की नौसैनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL), विशाखापत्तनम ने भारतीय नौसेना के लिए बारूदी सुरंग निष्क्रिय करने वाले मिशनों हेतु नई पीढ़ी के मानव-पोर्टेबल ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (MP-AUVs) सफलतापूर्वक विकसित किए हैं। ये AI-सुसज्जित रोबोट साइड स्कैन सोनार और कैमरों की मदद से स्वायत्त रूप से बारूदी सुरंगों का पता लगा सकते हैं और उनकी पहचान कर सकते हैं। इनके फील्ड ट्रायल सफल रहे हैं और जल्द ही इनका उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की है कि भारत अब 64,000 से अधिक पेटेंट के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा पेटेंट फाइलर बन गया है, जिनमें से 55% से अधिक भारतीय नवप्रवर्तकों द्वारा दायर किए गए हैं। उन्होंने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में 81वें स्थान से 38वें स्थान पर पहुंचने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
AI और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में प्रगति
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने जल अवसंरचना प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एकीकृत करने के लिए IIT कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य भूजल पुनर्भरण, जल और सीवेज उपचार संयंत्रों के पूर्वानुमानित रखरखाव और वास्तविक समय की निगरानी के साथ-साथ AI-सक्षम जन शिकायत निवारण के लिए AI-आधारित प्रणालियों का विकास करना है।
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, OMRON हेल्थकेयर ने भारत स्थित AI मेडटेक स्टार्टअप ट्राइकोग हेल्थ (Tricog Health) में अपना दूसरा निवेश किया है। इस निवेश का उद्देश्य भारत में AI-संचालित कार्डियक केयर को बढ़ावा देना है, जिससे हृदय संबंधी स्थितियों का वास्तविक समय में पता लगाने और प्रबंधन में सुधार होगा।
विज्ञान महोत्सव और प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण
उत्तराखंड में 12 से 14 नवंबर, 2025 तक छठा देहरादून अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महोत्सव (DISTF-2025) आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और नवाचारों का प्रदर्शन करना है। उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय दूरसंचार सेवा (ITS) के हीरक जयंती समारोह में कहा कि प्रौद्योगिकी को मानवता की सेवा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी भारतीय पीछे न छूटे। उन्होंने 5G और 6G जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ भारत को कनेक्टिविटी के भविष्य की ओर ले जाने का आग्रह किया।